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जब गाँधी ने कहा कि-”इस पृथ्वी के पास हमारी जरूरतें पूरा करने की पूरी क्षमता है, किंतु लालच एक व्यक्ति का भी पूरा नहीं कर सकती।“ अध्ययन में पर्यावरण मित्र विकास व सतत् विकास आदि शब्द बाद में विकसित हुए हैं, किंत ुधारणीय विकास का भाव गाँधी चिंतन में बहुत पहले ही आ गया था। दुनिया ने अलग-अलग दौर में विभिन्न आर्थिक मॉडल देखें हैं, किंतु गाँधी मॉडल विशिष्ट है। चाहे पँूजीवादी अर्थव्यवस्था हो या समाजवादी अर्थव्यवस्था एक स्तर पर आकर दुनिया ने इन आर्थिक मॉडल्स का अधूरापन देखा है। गाँधी ऐसे विकास के विरोधी थे जो पर्यावरण को क्षति पहँुचाकर हासिल किया गया हो। आज दुनिया में पर्यावरण मित्र विकास की जो बहस चल रही है उसका आधार गाँधी चिंतन में तभी स्थापित हो गया था, दुनिया में जितने भी आर्थिक मॉडल हुये हैं, उनके केन्द्र में भौतिक विकास रहा है। गाँधी का आर्थिक मॉडल नैतिक विकास पर बल देता है। सत्य और अहिंसा का विचार गाँधी के हर विचार के केन्द्र में है।गाँधी एक ऐसी अर्थव्यवस्था के निर्माण के पक्षधर थे, जो व्यक्ति को अधिकाधिक स्वावलंबी बनाती हो। आर्थिक विकास का गाँधीवादी मॉडल ही सच्चे अर्थों में समावेशी मॉडल है, क्योंकि गाँधी का मत है कि अंतिम स्थिति में बैठे व्यक्ति का कल्याण होना चाहिए। जिसे गाँधी अंत्योदय कहते हैं।1 गांधी के आर्थिक मॉडल के साथ एक अन्य बात महत्त्वपूर्ण रूप से जुड़ती है और वह यह है कि ”गाँधी का आर्थिक मॉडल पर्यावरण मित्र है।“ गाँधी कुटीर उद्योग और विकेन्द्रित अर्थव्यवस्था के बहुत हिमायती थे। कुटीर उद्योग और विकेन्द्रित अर्थव्यवस्था परस्पर पूरक हैं। गाँधी का मत है-आर्थिक संसाधनों पर कुछ हाथों का ही नियंत्रण नहीं होनाचाहिए, अपितु इसका नियंत्रण एवं प्रसार सुदूर क्षेत्र में रह रहे लोगों तक होना चाहिए। आर्थिक केन्द्रीकरणशोषण एवं अन्याय का कारण बनता है। भारत के संविधान के नीति निर्देशकतत्वों में राज्य को कुटीर उद्योगों के प्रोत्साहन हेतु निर्देशित किया गया है। यह अलग बात है कि वैश्वीकरण,भूमण्डलीकरण और निजीकरण के दौर में दुनिया भर के कुटीर उद्योग दम तोड़ रहे हैं। बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने दुनियाभर के उत्पादन, पंूजी व उन्नत तकनीक पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इससे लोगों और परस्पर देशोंके मध्य आर्थिक असमानता बढ़ी है, और इससे समावेशी विकास का लक्ष्य पीछे जा रहा है।
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Cite Article:
"भारत में गाँधीदर्शन और अहिंसा का: एक राजनैतिक विश्लेषण", International Journal for Research Trends and Innovation (www.ijrti.org), ISSN:2455-2631, Vol.8, Issue 5, page no.543 - 546, May-2023, Available :http://www.ijrti.org/papers/IJRTI2305084.pdf
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000205166
ISSN:
2456-3315 | IMPACT FACTOR: 8.14 Calculated By Google Scholar| ESTD YEAR: 2016
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